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मानव इतिहास की 5 सबसे बड़ी हड़ताल, जिसे देख कर आप भी दंग रह जायेंगे

हड़ताल किसी भी देश के अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक होती है जिस देश में काम कर रहा मजदूर खुश नहीं होता उस देश की अर्थव्यवस्था कभी मजबूत नहीं हो सकती पर शायद आप मानव इतिहास की संख्या या पैसों के मामले में हुए सबसे बड़ी हड़ताल के बारे में नहीं जानते होंगे तो आज हम आपको बताएंगे कि वह कौन सी बड़ी हड़ताल थी जिन्हें मानव इतिहास में घटित हुई सबसे बड़ी हड़ताल में शामिल किया गया है।
1926 जनरल स्ट्राइक यूनाइटेड किंगडम:- 1926 में यूके में कोयला खान मजदूरों द्वारा की गई है इस हड़ताल को दुनिया में सबसे बड़ी हड़तालों में शामिल किया जाता है इस हड़ताल में 1200000 कोयला खान मजदूर सरकार द्वारा मजदूरी कम करने के विरोध में हड़ताल कर रहे थे टीयूसी यानी कि ट्रेड यूनियन कांग्रेस जो कि एक लेबर पार्टी थी वो मजदूर की तरफ से इस हड़ताल की अगुवाई कर रही थी पर सरकार को पूरी उम्मीद थी कि मजदूर हड़ताल पर जा सकते हैं इसीलिए यह विरोध रोकने के लिए सरकार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी थी। 3 मई 1926 से लेकर 12 मई 1926 तक 9 दिन तक चले इस हड़ताल में मजदूरों के हाथ छोटी मोटी हिंसा के सिवाय कुछ नहीं लगा तथा यह हड़ताल पूरी तरह से नाकाम रही। इस हड़ताल को दुनिया भर में ब्रिलियंट फेलियर नाम से जाना गया। इसके बाद टीयूसी के नेता का कहना था कि हालांकि हम हार गए पर जिस तरह से इतनी भारी संख्या में मजदूर इकट्ठा हुआ हुए थे मजदूरों को उनकी ताकत का अंदाजा हो गया है।1926 जनरल स्ट्राइक यूनाइटेड किंगडम
1934 टेक्सटाइल वर्कर स्ट्राइक :- 1934 में अमेरिका के प्रेसिडेंट फ्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट ने नीरा यानि की नेशन इंडस्ट्रियल रिकवरी एक्ट के तहत टेक्सटाइल मजदूर के काम करने के घंटे हफ्ते में 60 से लेकर 40 कर दिए पर मील मालिकों ने मजदूर जितने माल का 60 घंटों में उत्पादन करते थे उतने ही माल का उत्पादन 40 घंटों में करने की सख्ती करने लगे इसी वजह से मजदूरों की हालत बद से बदतर होती चली गई। आगे जाकर मजदूरों की संघटना 15000 से लेकर ढाई लाख तक हो गई। 1934 में इस संगठन ने 3 शर्तें मील मालिकों के सामने रखी गई पहली हमारी यूनियन को पहचान मिले, दूसरी काम करने के घंटे 40 से लेकर हफ्ते में 30 घंटे कर दिए जाएं और तीसरे हर मजदूर को कम से कम निश्चित मजदूरी तय की जाए। इन सब मांगों को मानने से जब मिल मालिकों ने इनकार कर दिया तो करीब 400000 मजदूर हड़ताल पर चले गए। परिणाम यह हुआ कि अमेरिका की 60% से भी ज्यादा टेक्सटाइल इंडस्ट्री बंद हो गई। प्रेसिडेंट ने जब मजदूरों की बात सुनने के लिए समिति स्थापित की तब जाकर मजदूरों ने काम शुरू कर दिया है। इतना होने के बावजूद मजदूरों के हाथ कुछ खास नहीं होता पाया।1934 टेक्सटाइल वर्कर स्ट्राइक

1959 यूएसडब्लू स्टील स्ट्राइक:- 1959 में अमेरिका की स्टील कंपनियां मुनाफा कमाने के मामले में उफान पर थी यूनाइटेड स्टील वर्कर्स यूनियन जिन्हें USW भी कहा जाता है मजदूरों की इन संगठनों का कहना था कि मजदूरों का वेतन बढ़ा कर इसका एक फायदे का उनको भी दिया जाना चाहिए पर स्टील कंपनी के मालिकों की कुछ शर्ते थी जिन्हें USW ने मानने से इनकार कर दिया जैसे ही कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो गया 500000 मजदूरों ने हड़ताल शुरू कर दी। दोनों ही पक्षों ने अपनी अपनी तरफ से संभव समझौते करने की कोशिश की पर सब कुछ नाकाम रहा। अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट ने इस मामले में दखल देते हुए एक अच्छा समझौता दोनों पक्षों के सामने रख दिया। जिसमें घंटे की मजदूरी में 7 सेंट की बढ़ोतरी पेंशन और भी कई हेल्थ बेनिफिट शामिल थे। 1 महीने की हड़ताल के बाद आखिरकार यह समझौता दोनों पक्षों ने मंजूर कर लिया। जिसके बाद अमेरिका की सबसे बड़ी हड़ताल का अंत हो सका।united still worker

1974 रेलवे स्ट्राइक इंडिया :- 8 मई 1974 में 7000000 से भी ज्यादा भारतीय रेलवे कर्मचारी हड़ताल पर चले गए उनका कहना था कि काम करने का समय 8 घंटे से ज्यादा ना हो तथा उनके वेतन में बढ़ोतरी की जाए हालांकि भारत स्वतंत्र होने के बाद उनके वेतन में समय समय पर बढ़ोतरी की गई थी पर वेतन बढ़ाने और काम करने की व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने की हुआ करती थी। इस व्यवस्था को बदलने के लिए 70% से भी ज्यादा रेल कर्मचारी हड़ताल कर रहे थे पर सरकार ने उनकी यह मांगे ठुकरा दी। हजारों लोगों को जेल में डाल दिया गया तथा कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा बिगड़ते हालात को देखकर यह हड़ताल 27 मई 1974 को पीछे ले ली गई। 20 दिन तक चली है हड़ताल पूरी तरह से नाकाम हो गई। संख्या के हिसाब से देखा जाए तो उस वक्त की सबसे बड़ी हड़तालों में से एक थी।

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इंडियन जनरल स्ट्राइक 2016 :- 2 सितंबर 2016 को भारत में 15 करोड़ से ज्यादा पब्लिक सेक्टर में काम करने वाले मजदूरों ने 24 घंटों के लिए देशव्यापी हड़ताल की। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के पब्लिक सेक्टर के निजीकरण तथा और भी कई पॉलिसी के विरोध में यह हड़ताल की गई थी। जिसमें पब्लिक सेक्टर में काम कर रहे मजदूरों का न्यूनतम वेतन ₹15000 हो ये मांग शामिल थी। 24 घंटे तक चली यह हड़ताल भारतीय रुपए में करीब 18 करोड़ का नुकसान कर दिया दुनिया में पहली बार ऐसा हुआ था कि 15 करोड़ से भी ज्यादा लोग एक ही हड़ताल में शामिल हो।

आपकी इस हड़ताल के बारे में क्या राय है आप हमें नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए

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